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پیامدهای غیر منتظره رشد نرخ نفت [وستی کافکازا (روسیه)،28 فوریه 2018، مترجم: شادی اصغری]

دو سال پیش، در ماه فوریه سال 2016 میلادی، نرخ نفت در ازای هر بشکه 30 دلار شده و پیش بینی های کارشناسان منفی بود. در آن ایام، آژانس بین المللی انرژی هشدار می داد که اگر اوضاع تغییر نکند، احتمال دارد، بازار نفت در اثر عرضه بیش از حد تولیدات دچار مشکلاتی شود. به نوشته نشریه فوربس، در آن ایام، یک سوم تمامی شرکت های نفتی جهان در مرز ورشکستگی قرار گرفته بودند. شاخص های اقتصادی چین طی 25 سال اخیر، پایین ترین میزان رشد را نشان می دادند و به رغم درخواست های مکرر از اوپک پیرامون کاهش سطح استخراج نفت، این سازمان هیچ اقدامی نمی کرد. از آن زمان فقط دو سال گذشته و نرخ نفت دو برابر شده است. این احتمال قوت گرفته است که تا پایان ماه فوریه، نرخ نفت WTI، در ازای هر بشکه به بیش از 60 دلار برسد. نشریه فوربس در خصوص رشد نرخ نفت طی دو سال اخیر، سه پیامد غیر منتظره ای را مطرح می کند

پیامدهای غیر منتظره رشد نرخ نفت
دو سال پیش، در ماه فوریه سال 2016 میلادی، نرخ نفت در ازای هر بشکه 30 دلار  شده و پیش بینی های کارشناسان منفی بود. در آن ایام، آژانس بین المللی انرژی هشدار می داد که اگر اوضاع تغییر نکند، احتمال دارد، بازار نفت در اثر عرضه بیش از حد تولیدات دچار مشکلاتی شود. به نوشته نشریه فوربس، در آن ایام، یک سوم تمامی شرکت های نفتی جهان در مرز ورشکستگی قرار گرفته بودند. شاخص های اقتصادی چین طی 25 سال اخیر، پایین ترین میزان رشد را نشان می دادند و به رغم درخواست های مکرر از اوپک پیرامون کاهش سطح استخراج نفت، این سازمان هیچ اقدامی نمی کرد. از آن زمان فقط دو سال گذشته و نرخ نفت دو برابر شده است. این احتمال قوت گرفته است که تا پایان ماه فوریه، نرخ نفت WTI، در ازای هر بشکه  به بیش از 60 دلار برسد.
نشریه فوربس در خصوص رشد نرخ نفت طی دو سال اخیر، سه پیامد غیر منتظره ای را مطرح می کند:
1 – آن دست از افرادی که در پروژه های نفت شیل سرمایه گذاری می کنند، سود می برند. صنعت نفت شیل دوره انسجام خود را گذارنده است. شرکت هایی که ورشکست نشده اند، اجبارا، با اوضاع سازگاری یافته اند. شرکت های نفت شیل امریکایی بسیار تأثیر گذار بوده اند و از روش های جدیدی برای حفاری با هزینه کمتر استفاده کرده اند. با این همه، اکثر شرکت ها موفق به بازگرداندن سرمایه های خود نشده اند. این وضعیت به رغم رشد نرخ نفت و سطح رکورد دار استخراج نفت در آمریکا ادامه خواهد داشت.
2- در سال 2016 میلادی، کارشناسان و تحلیلگران اغلب، اوپک را سازمان مرده می خواندند. اوپک از جنبه اخذ تدابیر لازم، سازمان غیر سازنده و ناتوان و فاقد اراده قوی لازم برای کاهش سطح استخراجات و افزایش نرخ نفت به شمار می رفت. در سال 2016 میلادی، بسیاری از ناظران از علی النعیمی، وزیر وقت نفت عربستان سعودی، انتقاد می کردند که از کاهش سطح استخراج نفت در سال های 2015 – 2014 میلادی، بدون قبول تعهدات جدی از سوی هر یک از اعضای این کارتل و برخی از کشورهای غیر عضو  اوپک امتناع کرده بود. و وقتی نرخ نفت دو برابر شد، اهمیت اوپک برای صنعت و شرکت های مالی مجددا، فزونی یافت. در اواخر سال 2016 میلادی، خالد الفلیح، وزیر نفت عربستان سعودی، پیرامون کاهش استخراج نفت با اعضای اوپک و تولید کنندگان کلیدی غیر عضو در این سازمان و از جمله، روسیه و قزاقستان به توافق رسید. این توافق در کاهش میزان عرضه نفت  در بازار و افزایش نرخ نقش مهمی ایفا کرد. الفلیح حتی، موفق شد روسیه را برای پیوستن به این توافق متقاعد سازد و در حال حاضر، این کشورها می توانند روی طرح تشکیل «سوپر گروه» دائمی متشکل از اعضای اوپک و دیگر کشورها فعالیت کنند. اکنون استراتژی النعیمی و الفلیح چندان به نظر اشتباه نمی آید.
3 – اوضاع اقتصادی حاکم در ونزوئلا و ایران وخیم تر نشده است. در ابتدا، اقتصاد ونزوئلا تاثیر منفی نرخ پایین نفت را احساس کرد و ضربه بسیار جدی بر آن وارد شد. زیرا، استخراج نفت در ونزوئلا مستلزم صرف هزینه های زیادی است و اقتصاد این کشور به شدت، به درآمدهای نفتی وابسته است. اگرچه، در حال حاضر، نرخ نفت نسبت به دو سال پیش دو برابر شده است، اما شاخص های اقتصادی ونزوئلا همچنان رو به افت است. این کشور تا حدی نیازمند پول است که حتی، قادر نیست میزان  استخراج نفت خود را تا سهم مشخص شده از سوی اوپک برساند. در حال حاضر، خبرهای منتشره حاکی از آن اند که متخصصان نفتی ونزوئلا در اثر قحطی و گرسنگی نمی توانند به کار خود ادامه دهند.
اقتصاد ایران نیز به رغم نرخ بالای نفت و لغو تحریم ها هنوز احیا نشده است. ایران باید یاران بین المللی را برای بهبود زیر ساخت های انرژی خود جذب کند. اما، شرکت های نفتی و گازی بین المللی با ایران همکاری نمی کنند، زیرا دولت این کشور برای ارائه قراردادهای سودمند توانایی ندارد. خطاهای دولت های ایران و ونزوئلا به این ختم خواهد شد که حتی، با نرخ بالای امروزی نفت، وضعیت اقتصادی این کشورها قادر نباشند احیا شوند.

 

Неожиданные последствия роста нефтяных цен
Два года назад, в феврале 2016-го, цены на нефть находилась в диапазоне $30 за баррель, а прогнозы экспертов были негативными. В то время Международное энергетическое агентство предупреждало, что если ситуация не изменится, то нефтяной рынок может утонуть из-за переизбытка предложения. Как пишет Forbes, тогда треть всех мировых нефтяных компаний была на грани банкротства. Экономические показатели Китая продемонстрировали самый медленный рост за последние 25 лет, и несмотря на многочисленные призывы к ОПЕК сократить уровень добычи, организация ничего не делала. Прошло всего два года, а цена нефти выросла вдвое. Вполне вероятно, что к концу февраля цена WTI подпрыгнет выше $60 за баррель.
Forbes представляет три неожиданных последствия роста цен на нефть, наблюдаемого последние два года.
1. Те, кто инвестирует в сланцевые проекты, ждут прибыли. Сланцевая нефтяная промышленность пережила период консолидации. Компаниям, которые не обанкротились, пришлось адаптироваться. Американские сланцевые компании показали большую эффективность и использовали новые методы бурения при меньших затратах. Тем не менее большинство компаний так и не смогло вернуть инвестиции. Эта ситуация продолжается, несмотря на рост цен на нефть и рекордные уровни добычи в Соединенных Штатах.
2.  В 2016 году эксперты и аналитики часто называли ОПЕК мертвой организацией. ОПЕК считалась неактуальной, неспособной принять необходимые меры организацией, которая не обладала достаточной силой воли, чтобы сократить добычу и увеличить цены на нефть. Многие наблюдатели в 2016 году критиковали тогдашнего министра нефти Саудовской Аравии Али аль-Наими, который отказался от сокращения добычи в 2014-2015 годах без принятия серьезных обязательств со стороны каждого члена картеля и некоторых стран, не входящих в ОПЕК. Теперь, когда цены на нефть выросли вдвое, актуальность ОПЕК для промышленности и финансовых компаний вновь выросла. В конце 2016 года министр нефти Саудовской Аравии Халид аль-Фалих договорился о сокращении добычи с членами ОПЕК и ключевыми производителями, не входящими в организацию, такими как Россия и Казахстан. Это соглашение сыграло важную роль в снижении переизбытка предложения на рынке и повышении цен. Фалиху даже удалось уговорить Россию присоединиться к этой сделке, и теперь страны могут работать над созданием постоянной "супергруппы", включающей членов ОПЕК и другие государства. Стратегии Наими и Фалиха больше не кажутся настолько ошибочными.

3. Экономическая ситуация в Венесуэле и Иране не ухудшилась. Экономика Венесуэлы первой ощутила негативное влияние низких цен на нефть. Был нанесен весьма серьезный ущерб, так как добыча нефти в Венесуэле требует больших затрат, а экономика сильно зависит от нефтяных доходов. Хотя цены на нефть сейчас вдвое больше, чем были два года назад, экономические показатели Венесуэлы продолжают падать. Страна настолько нуждается в деньгах, что она даже не может позволить себе добывать достаточное количество нефти, чтобы соответствовать квоте, установленной ОПЕК. В настоящее время поступают сообщения о том, что венесуэльские нефтяники не могут выполнять свою работу из-за голода.
Экономика Ирана также не восстановилась, несмотря на более высокие цены и снятие санкций. Иран должен привлечь международных партнеров для улучшения своей энергетической инфраструктуры. Но международные нефтегазовые компании не работают с Ираном, поскольку правительство не готово предлагать выгодные контракты. Ошибки правительств Ирана и Венесуэлы приводят к тому, что даже при сегодняшних высоких ценах на нефть экономики этих стран не смогут восстановиться.


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